parmatma ka kaisa hai ?
आओ विचार करें प्रमात्मा कैसा होगा। प्रमात्मा आदमी जैसा नही।
Ish message ko sabi daason mein shere kro. Logon ko pakhand se bchao.
👉आज हम विचार करेंगे कि वह प्रमात्मा जिसने इस ब्रह्मांड की रचना की। जिसकी रचना के छोटे से धरती नामक जगह पर हम रहते हैं। वो कैसा होगा? क्या वो धरती पर या किसी मानव काल्पनिक क्षेत्र में रहता है? स्वाल तो और भी बहुत हैं। पर हम इन दो प्रशनो पर ही विचार करते हैं।
सायद आप लोग भी देख रहे हैं कि आजकल गुरु और संत बहुत से लोगों को प्रमात्मा के नाम पर उनका माईंडवास करके सम्पत्ति अर्जित कर रहे हैं। हमे बस इन लोगों के चंगुल से निकलना और दूसरों को निकालने का प्रयास करना है।
प्रमात्मा :- परम+आत्मा = मतलब वह आत्मा जो हम अर्थात हमारी आत्मा से परम है जिससे हम आत्माएं पैदा हुई यह ब्रह्मांड पैदा हुआ वो प्रमात्मा है करतार है अल्लाह है गौड है।
कई ग्रंथों में लिखा है कि प्रमात्मा ने छ दिन में सृष्टि रचि और सातवें दिन तख्त पर जा बैठा । यह बात तो इस तरह लिख दी गई है जैसे वह ग्रंथकार प्रमात्मा को सृष्टि रचते देख रहा हो। इस बात में कितनी सचाई है आओ विचार करें?
सबसे पहले तो हमें ये सोचना विचारना चाहिए कि जो लोग ये कहते हैं प्रमात्मा ने छ दिन में सृष्टि की वो पृथ्वी पर रहते हैं और यह पृथ्वी जीव जंतु और मानव रूपी जीव से पहले बनी। और पृथ्वी से भी पहले जल अर्थात नार बना और जल से भी पहले वायु और अग्नि बनी होगी इन तीनों जल वायु और अग्नि को मिलकर बनी जलवायु। इसी जलवायु मे तत्व रुप से ओक्सीजन है उसी ओक्सीजन से जीव का जीवन है। जहां जलवायु नही उन ग्रहों पर जीवन भी नही। मतलब ये कि आदिमानव की उत्पत्ति पृथ्वी की उत्पत्ति के बाद हुई। तो क्या उपरोक्त कथनो से आपको लगता है कि कोई मानव प्रमात्मा कैसा है और उसको सृष्टि रचते देख रहा होगा।।
मेरे विचार से तो यह छ दिन में सृष्टि रचना वाली बात काल्पनिक और बेबुनियाद है।
अब रही बात प्रमात्मा कैसा है और कहा रहता है? जिस तरह हमारी आत्मा अर्थात मन की शक्ति से हमरा भौतिक शरीर चलता है यह शरीर नाशवंत है पर आत्मा अमर है और दिखाई नही देती जो दिखाई देता है वह समय अनुसार परिवर्तित होता है। उसी तरह अदृश्य प्रमात्मा संपूर्ण ब्रह्मांड को अपनी शक्ति से चला रहा है। वह कैसा है कोई नही जानता। पर जीव के लिए प्राण रूप वायु ही प्रमात्मा है।
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