संदेश

जनवरी, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जानिए कबीर जी के सतगुरु कौन थे ?

चित्र
janiye: कबीर जी के सतगुरु कौन थे दोस्तो आजकल कुछ धर्म के व्यापारी 'प्रचार' कर रहे हैं और अपनी पुस्तकों में लिख रहे हैं कि कबीर दास जी परमात्मा है और "गुरु नानक देव" जी को "सचखंड" लेकर गै यह बात बिल्कुल झूठ है। सच जानना है तो आप "प्राण संगली" जो गुरु नानक देव जी के सामने लिखी गई जो "गुरु ग्रंथ साहब" से भी पहले की है। तब लग कबीर दास के बारे एक भी पुस्तक नहीं लिखी गई "कबीर बीजक" भी सन १९०० के आसपास लिखा गया। 'प्राणसंगली' में कबीर दास और नानक जी गोष्ठी हुई जो प्राणसंगली में "गोष्ठी कबीर नाल होई" नाम से अध्याय है जिसका कुछ अंश जिसमें 'कबीर दास ने नानक देव जी को सतगुरु कहा' निम्नलिखित है  * प्रायण सगली १००" बहुत भाँति तप सिमरन कीना। तऊ न एहु मनु चंचल भीना ॥ हार परे सतिगुर के दुआरे। गुर नाम दान दे लीए उबारे ॥ १०॥ समझ परी तत्र भयो उदासी । तत्र काटी जम काल की फासी॥ जात कमीन जुलहा अपराधी । गुरु किरपा ते भगति समाधी ॥ सत्तिपुरुप सतिगुरु ते पाया। तब सतनाम लै रिदै बसाया ॥ मुक्त भये सतिगुर के शब्दी, ...

क्या अगस्त संहिता में 'कबीर' के बारे में लिखा है ?

चित्र
क्या अगस्त संहिता में 'कबीर' के बारे में लिखा है ? यह प्रश्न बहुत लोग पूछते हैं क्योंकि कुछ कबीर पंथी जो रामपाल कैदी के शिष्य हैं वो कुप्रचार करते हैं कि 'अगस्त संहिता' में 'कबीर' लिखा है जबकि सच यह है कि यह झूठ है क्योंकि सभी पुरातनकाल के ग्रंथों में 'कवि' लिखा है पर कबीर नहीं । कबीर एक अरबी भाषा का शब्द है और पुरातनकाल के ग्रंथ संस्कृत भाषा में हैं  अगस्त संहिता copy 👇 अगस्त संहिता की इस उपरोक्त श्लोक ४० का हवाला देते हुए कबीर पंथी प्रमाण देते हैं कि देखो संहिता में 'कबीर' लिखा है जबकि यह संस्कृत भाषा में 'कविरस्तु' लिखा है इस श्लोक ४० का मतलब क्या है और भावार्थ क्या है देखिए 👇 शब्द अर्थ  प्रह्लादोऽपि – प्रह्लाद जैसा (अत्यंत भक्त/उत्तम स्वभाव वाला) कविरस्तु – कवि/ज्ञानी/बुद्धिमान हो कुजे – कुज = मंगल ग्रह सिंहे च – सिंह राशि में शोभने – शुभ स्थिति में जातः – जन्म लेने वाला वेदान्त-सन्निष्ठः – वेदान्त में दृढ़ निष्ठा रखने वाला क्षेत्र-वास-रतः – भूमि/क्षेत्र (खेत, ग्राम, आश्रम या           साधना-स्थान) में रहने वाला सदा – हम...