क्या अगस्त संहिता में 'कबीर' के बारे में लिखा है ?
क्या अगस्त संहिता में 'कबीर' के बारे में लिखा है ?
यह प्रश्न बहुत लोग पूछते हैं क्योंकि कुछ कबीर पंथी जो रामपाल कैदी के शिष्य हैं वो कुप्रचार करते हैं कि 'अगस्त संहिता' में 'कबीर' लिखा है जबकि सच यह है कि यह झूठ है क्योंकि सभी पुरातनकाल के ग्रंथों में 'कवि' लिखा है पर कबीर नहीं । कबीर एक अरबी भाषा का शब्द है और पुरातनकाल के ग्रंथ संस्कृत भाषा में हैं
अगस्त संहिता copy 👇
अगस्त संहिता की इस उपरोक्त श्लोक ४० का हवाला देते हुए कबीर पंथी प्रमाण देते हैं कि देखो संहिता में 'कबीर' लिखा है जबकि यह संस्कृत भाषा में 'कविरस्तु' लिखा है इस श्लोक ४० का मतलब क्या है और भावार्थ क्या है देखिए 👇
शब्द अर्थ
प्रह्लादोऽपि – प्रह्लाद जैसा (अत्यंत भक्त/उत्तम स्वभाव वाला)
कविरस्तु – कवि/ज्ञानी/बुद्धिमान हो
कुजे – कुज = मंगल ग्रह
सिंहे च – सिंह राशि में
शोभने – शुभ स्थिति में
जातः – जन्म लेने वाला
वेदान्त-सन्निष्ठः – वेदान्त में दृढ़ निष्ठा रखने वाला
क्षेत्र-वास-रतः – भूमि/क्षेत्र (खेत, ग्राम, आश्रम या साधना-स्थान) में रहने वाला
सदा – हमेशा
भावार्थ:-(सरल हिंदी में)
जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह सिंह राशि में शुभ स्थिति में हो, वह व्यक्ति प्रह्लाद जैसा भक्त, कवि या विद्वान होता है। ऐसा व्यक्ति वेदान्त में आस्था रखने वाला, आध्यात्मिक स्वभाव का होता है और प्रायः भूमि, ग्राम या शांत स्थान में निवास करने वाला होता है।
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यह बिल्कुल सही मतलब है श्लोक ४० का ।
कृपया झूठ से सावधान रहें
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