baba jinda and guru nanak dev ji
बाबा_जिंदा और गुरुनानकदेव जी _ बाबा जिंदा कौन? ये सब जानने के लिए इस पोस्ट को ध्यान से पडें | ये पोस्ट बाले वाली साखी मे से है साखी मीना परबत की |
साखी सुरु _ जब जोगी झंगरनाथ जी नानक जी के साथ गोष्ठी मे हार कर चला गया |तो मरदाना ने कहा जी तुम तो निरंकार है तेरे सामने कोई नही टिकता सब हार कर चले जाते हैं | तो गुरुनानक जी ने वचन कहा ~मरदाना, हमारा इतना बड़ा गुरु है जो निरंकार के बिना मेरी नजर मे कोई नही है | और मरदाना यहां कबीर भगत इत्यादि कई महात्मा हुए हैं पर किसी को मानष देही मे निरंकार का दर्शन नही हुआ | तो फिर मरदाने ने कहा ~तुम मे और निरंकार में कोई फरक नही | तो नानक जी ने कहा ~ मरदाने, निरंकार को सब एक जैसे ही हैं | तो मरदाने ने कहा ~ गुरु जी अब आगे चलो | तो फिर गुरु जी मीना परबत गए |
(* यहां पर नानक जी ने साफ कहा है कि कबीर भगत और कई महात्मा जो हुए हैं किसी को प्रमेश्वर के जिंदे जी दर्शन नही हुआ)
श्री गुरु नानक जी अंतरध्यान हुऐ तो समेत मरदाना मीना परबत पर जा खड़े हुऐ | तो मरदाना ने पूछा गुरु जी हम कहां आए हैं? तो गुरू नानक जी ने जवाब दिया हम अब मीना परबत पर आए हां | तो मरदाना ने पूछा गुरु जी हम अब कितने जोजन उपर आए हां? तो नानक जी ने कहा मरदाना हम अब सोलहां हजार जोजन आए हां | तो मरदाना ने पूछा जी यहां से सुमेर परबत कितनी दूर है? तो नानक जी ने कहा ~ यहां से समेर परबत एक हजार जोजन रहता है |
तो फिर मरदाने ने पूछा ~गुरु जी आपको जो गरु मिला था उसका नाम क्या था?
नानक जी ने कहा ~उसका नाम बाबा जिंदा कहते हैं | जल और वायु उसके हुक्म मे चलते हैं आग और मिटी ये भी उसके कहे में है इसको बाबा कहना चाहिए दूसरे किसी को बाबा नही कहना |
तो मरदाना ने कहा ~गुरु जी हम भी तो तुम्हारे साथ थे आप को कब मिला?
तो गुरु नानक जी ने कहा ~ मरदाना तुम अभी हमारी जगह नही पहुंचे | जब सुलतान पुर मे डुबकी लगाई और तीन दिन हम उसके पास ही रहे तब |मरदाने भाई बाला जानता है वो ऐसा गुरु है जिसकी सता, संपूर्ण जगत को आशरा दे रही है सुन मरदाने जिंदा उसको कहते हैं जिसके वश मे काल हो पर वो काल के वश या प्रभाव में न हो |
तो मरदाना ने पूछा ~गुरु जी उसका रंग कैसा है ?
तो नानक जी ने कहा ~ रंग लाल है पर कोई भी लाली उससे मेल नही खाती | रोम सुनहरे हैं पर सोने की रंग भी उसके बराबर नही |मरदाने वो बोलता नही पर उसके रोम रोम से एक ही शब्द हो रहा है गहर गंभीर गहर गम्भीर गहर गम्भीर |
तो मरदाना ने कहा ~ धन्य हो गुरु जी आप के बिना हमारी निषा या संतुष्टि पूरी कौन करे || और मरदाना ने कहा गुरु जी अब सुमेर पर चलो |
Note जब नानक जी कह रहे हैं कि भगत कबीर और कई महात्मा हुए हैं पर किसी को मानष देही मे निरंकार का दर्शन नही हुआ | तो बाबा जिंदा कबीर कैसे?
बाबा जिंदा निरंकार परमेश्वर थे जो बाबा जिंदा के रूप मे बस नानक जी को ही जल सतह के नीचे मिले |
निरंकार परमेश्वर ने नानक जी को देही मे मिले | परन्तु भगत कबीर को देही के साथ नही मिले क्योंकि भगत कबीर राजा राम के पूजारी थे और नानक निरंकार परमेश्वर के |
धन्यवाद
साखी सुरु _ जब जोगी झंगरनाथ जी नानक जी के साथ गोष्ठी मे हार कर चला गया |तो मरदाना ने कहा जी तुम तो निरंकार है तेरे सामने कोई नही टिकता सब हार कर चले जाते हैं | तो गुरुनानक जी ने वचन कहा ~मरदाना, हमारा इतना बड़ा गुरु है जो निरंकार के बिना मेरी नजर मे कोई नही है | और मरदाना यहां कबीर भगत इत्यादि कई महात्मा हुए हैं पर किसी को मानष देही मे निरंकार का दर्शन नही हुआ | तो फिर मरदाने ने कहा ~तुम मे और निरंकार में कोई फरक नही | तो नानक जी ने कहा ~ मरदाने, निरंकार को सब एक जैसे ही हैं | तो मरदाने ने कहा ~ गुरु जी अब आगे चलो | तो फिर गुरु जी मीना परबत गए |
(* यहां पर नानक जी ने साफ कहा है कि कबीर भगत और कई महात्मा जो हुए हैं किसी को प्रमेश्वर के जिंदे जी दर्शन नही हुआ)
श्री गुरु नानक जी अंतरध्यान हुऐ तो समेत मरदाना मीना परबत पर जा खड़े हुऐ | तो मरदाना ने पूछा गुरु जी हम कहां आए हैं? तो गुरू नानक जी ने जवाब दिया हम अब मीना परबत पर आए हां | तो मरदाना ने पूछा गुरु जी हम अब कितने जोजन उपर आए हां? तो नानक जी ने कहा मरदाना हम अब सोलहां हजार जोजन आए हां | तो मरदाना ने पूछा जी यहां से सुमेर परबत कितनी दूर है? तो नानक जी ने कहा ~ यहां से समेर परबत एक हजार जोजन रहता है |
तो फिर मरदाने ने पूछा ~गुरु जी आपको जो गरु मिला था उसका नाम क्या था?
नानक जी ने कहा ~उसका नाम बाबा जिंदा कहते हैं | जल और वायु उसके हुक्म मे चलते हैं आग और मिटी ये भी उसके कहे में है इसको बाबा कहना चाहिए दूसरे किसी को बाबा नही कहना |
तो मरदाना ने कहा ~गुरु जी हम भी तो तुम्हारे साथ थे आप को कब मिला?
तो गुरु नानक जी ने कहा ~ मरदाना तुम अभी हमारी जगह नही पहुंचे | जब सुलतान पुर मे डुबकी लगाई और तीन दिन हम उसके पास ही रहे तब |मरदाने भाई बाला जानता है वो ऐसा गुरु है जिसकी सता, संपूर्ण जगत को आशरा दे रही है सुन मरदाने जिंदा उसको कहते हैं जिसके वश मे काल हो पर वो काल के वश या प्रभाव में न हो |
तो मरदाना ने पूछा ~गुरु जी उसका रंग कैसा है ?
तो नानक जी ने कहा ~ रंग लाल है पर कोई भी लाली उससे मेल नही खाती | रोम सुनहरे हैं पर सोने की रंग भी उसके बराबर नही |मरदाने वो बोलता नही पर उसके रोम रोम से एक ही शब्द हो रहा है गहर गंभीर गहर गम्भीर गहर गम्भीर |
तो मरदाना ने कहा ~ धन्य हो गुरु जी आप के बिना हमारी निषा या संतुष्टि पूरी कौन करे || और मरदाना ने कहा गुरु जी अब सुमेर पर चलो |
Note जब नानक जी कह रहे हैं कि भगत कबीर और कई महात्मा हुए हैं पर किसी को मानष देही मे निरंकार का दर्शन नही हुआ | तो बाबा जिंदा कबीर कैसे?
बाबा जिंदा निरंकार परमेश्वर थे जो बाबा जिंदा के रूप मे बस नानक जी को ही जल सतह के नीचे मिले |
निरंकार परमेश्वर ने नानक जी को देही मे मिले | परन्तु भगत कबीर को देही के साथ नही मिले क्योंकि भगत कबीर राजा राम के पूजारी थे और नानक निरंकार परमेश्वर के |
धन्यवाद
अरे मूर्ख जब कबीर स्वयं परमेश्वर हैं तो उन्हें देही में कौन मिल सकता है,और रही बात नानक जी की तो,नानक जी को वेई नदी पर स्वयं कबीर परमेश्वर बाबा जिंदा के रूप में मिले थे, तथा केवल वे ही काल के ऊपर हैं तथा काल उनके वश में है,
जवाब देंहटाएंजम जौरा जासै डरैं धर्मराय धरै धीर,
जवाब देंहटाएंऐसा सत गुरु एक है,अदली असल कबीर ,