Nanak ji ko Satnam kisne diya ?

Nanak ji ko Satnam nirankar ne diya kabir bhagat ne nhi
Nanak ji ko Satnam nirankar ne diya kabir bhagat ne nhi 

रामपाल का क्या झूठ क्या सच देखो जो इसने अपनी साईट पर लिखा है
Guru Nanak Dev kept Satnam Secret - Janam Sakhi - Bhai Bale wali
रामपाल का झूठ 👇
God Kabir had asked Guru Nanak Dev Ji for
 this secret information about the True Naam (Satnaam) not to be revealed
रामपाल का झूठ 👆

Evidence in Bhai Bale Wali - JANAM SAKHI - Shri Guru Nanak Dev Ji

Page 275: Agge Sakhi Sachkhand di Challi - ਆਗੇ ਸਾਖੀ ਸਚਖੰਡ ਦੀ ਚਲੀ

ਤਾਂ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਜੀ ਧੁਰ ਸਚਖੰਡ ਦਰਬਾਰ ਮੇਂ ਜਾਇ ਪਹੁੰਚੇ ਜਹਾਂ ਬਡਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਹੈ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਰੂਪ ਤਖ਼ਤ ਕੇ ਉਪਰ ਸਤ ਨਿਰੰਕਾਰ ਜੋਤੀ ਸਰੂਪ ਬੈਠੇ ਹੈਂ, ਸੰਪੂਰਨ ਭਗਤ ਅਵਤਾਰ ਹਾਥ ਜੋੜ ਕਰ ਖੜੇ ਹੈਂ ਅਤੇ ਬਾਬਾ ਨਾਨਕ ਜੀ ਨੇ ਓਹ ਜੋ ਕੋਟਾਨ ਸੂਰਜ ਕੇ ਸਮਾਨ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਹੈ ਕੋਟਾਨ ਚੰਦ੍ਰਮਾਂ ਜੈਸਾ ਸੀਤਲ ਇਸ ਕਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਹੈ ਉਸ ਸਚੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਵਿਖੇ ਪਰਵੇਸ਼ ਕਿਆ ਉਸ ਜੋਤ ਰੂਪ ਭਗਵਾਨ ਕੀ ਉਸਤਤ ਕਰੀ ਔਰ ਆਗੇ ਸਤ ਸਰੂਪ ਨਿਰੰਕਾਰ ਵਿਸ਼ਨੂੰ (here Vishnu means controller of all, nurturer of all) ਜੀ ਬਿਰਾਜਮਾਨ ਹੈਂ, ਸਰਬ ਸਮਰਥ ਸਰਬ ਸ਼ਕਤੀਵਾਨ ਭਗਵੰਤ ਜੀ ਨੇ ਕਹਿਆ ਆਓ ਨਾਨਕ ਭਗਤ ਤੂ ਸਦਾ ਹੀ ਮੇਰੇ ਮੇਂ ਮਿਲਿਆ ਹੈਂ, ਤੇਰੇ ਔਰ ਮੇਰੇ ਮੇਂ ਕੋਈ ਭੇਦ ਨਹੀਂ ਪਰ ਜਿਸ ਵਾਸਤੇ ਸੰਸਾਰ ਮੇਂ ਸਤਿਨਾਮ ਉਪਦੇਸ਼ ਕੇ ਜਪਾਓਨ ਕੇ ਵਾਸਤੇ ਗਏ ਸੇ ਸੋ ਦ੍ਰਿੜਾਯਾ ਹੈ ਤਾਂ ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਜੀ ਕਹਿਆ ਹੇ ਸਰਬੰਗ ਸਵਾਮੀ ! ਜਹਾਂ ਆਪ ਦੀ ਆਗਿਆ ਭਈ ਤਹਾਂ ਸਤਿਨਾਮ ਦੀ ਚਕ੍ਰ ਫੇਰਿਆ ਹੈ, ਜਹਾਂ ਜਹਾਂ ਆਪਕਾ ਹੁਕਮ ਹੋਏਗਾ ਤਹਾਂ ਤਹਾਂ ਸਤਿਨਾਮ ਕ ਚਕ੍ਰ ਫੇਰੇਂਗੈ, ਆਗੇ ਜਿਓਂ ਆਪਕੀ ਰਜਾਈ ਹੋਵੇਗੀ ਤਿਓਂ ਹੀ ਹੋਵੇਗਾ, ਐਸਾ ਕਹਿ ਕਰ ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਜੀ ਨੇ ਸ਼ਬਦ ਉਚਾਰਨ ਕੀਤਾ ਉਸਤਤਿ ਮੇਂ -

👆 पंजाबी पंक्तियां का हिंदी अनुवाद हम रजवंत चीमा कर रहा हूँ जो रामपाल जी ने नही किया क्योंकि इन पंक्तियों को रामपाल ने सही लिखा है हो सकता है समझ न सका हो , इन पंक्तियां मे कबीर का कोई नाम नही है |
👇 देंखें अनुवाद
तो नानक जी सचखंड दरबार जा पहुंचे जहां बहुत प्रकाश है प्रकाश रूप तखत के उपर सत निरंकार ज्योति सरूप बैठे हैं सम्पूर्ण भगत अवतार हाथ जोड़कर खड़े हैं और बाबा नानक जी ने वो जो कोटान सूरज के समान प्रकाश है कोटान चन्द्रमा जैसा सीतल उसका प्रकाश है उस सचे प्रकाश मे प्रवेश किया | उस जोतरूप भगवान की उसतत की और आगे सतसरूप निरंकार विशनु जी बिराजमान हैं, सरब समरथ सरब सक्तिमान भगवंत ने कहा आओ नानक ( पर यहां नानक के नाम के साथ रामपाल ने "भगत "शब्द लगया है जो मंनगडंत है) तुम सदा मुझ मे मिले हुए हो, तेरे और मेरे मे कोई फर्क नही | पर जिस के लिए संसार मे, सतनाम उपदेश जपवाने के लिए गए थे वो जपवाया है|
तो नानक जी ने कहा _हे सब के स्वामी! जहां आपकी आग्या हुई, वहां सतनाम का चक्र फेरेया है जहां जहां आपका का हुक्म होगा वहां वहां सतनाम का चक्र फेरेंगे ,आगे जैसे आप की रजा होगी वैसे ही होगा |ऐसा कहकर नानक जी ने शब्द उचारन किया..............
               अब आप ये बतायें कही कबीर भगत का नाम
भी है |     इससे दो बातें स्पष्ट हो गई
१_ प्रमेशवर निरंकार ज्योति सरूप है
२_ निरंकार परमेश्वर ने ही नानक जी को सतनाम का उपदेश सब भगतों को देने के लिए भेजा |
👉 उपरोक्त साखी मे कहीं भी परमान नही है कि कबीर भगत ने नानक को सतनाम दिया और कबीर गोड है का
कोई परमाण नही बस लोगों को मूर्ख बनाया जा रहा है |

टिप्पणियाँ

  1. अरे अज्ञानी यहाँ पर रामपाल जी ने ये नहीं कहा कि यहाँ पर कबीर नाम है ,यहाँ पर ये बताया है, कि परमेश्वर साकार है तथा वह तेजरूपी सिहांसन पर बैठा है ,तथा उसका तेजोमय शरीर है, और सत्यनाम के उपदेश के बारे में चर्चा हुई है|

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